
बस्तर संभाग की स्वसहायता समूह की महिलाओं को बिजनेस के व्यापक पक्षों की जानकारी देने दो दिवसीय मार्केटप्लेस साक्षरता कार्यशाला मंगलवार को प्रारंभ हुआ। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय एवं आईआईटी भिलाई की ओर से शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय,जगदलपुर में आयोजित इस वर्कशॉप में संभाग के करीब 400 स्वसहायता समूह की महिलाओं ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत संगठन मंत्री रामनाथ कश्यप, मुख्य प्रशिक्षक लोयोला मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी, लांस एंजिल्स, अमेरिका के कॉलेज ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मार्केटिंग विभाग के प्रोफेसर मधु विश्वनाथन एवं कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य उपस्थित रहे।

अपने स्वागत उद्बोधन में प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि यह कार्यशाला एक अभियान की तरह है जो बस्तर की महिलाओं को सशक्त बनाने व उनमें आत्मविश्वास जागरित करने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर सीमित बाजार से जूझ रहा है। यहां केवल उत्पादन ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि लोगों को सही बाजार, सही दाम जैसे व्यवसायिक पक्षों की जानकारी होना जरूरी है। प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि आर्थिक व सामाजिक परिवर्तन के लिए आयोजित इस कार्यशाला की सराहना प्रदेश शासन के कई मंत्री ने की है। बस्तर संभाग के सभी जिले को देश के विकसित जिले में शामिल करने लिए यह कार्यशाला महत्वपूर्ण योगदान देगा।

मुख्य अतिथि वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत संगठन मंत्री रामनाथ कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वस्तु विनिमय के आधार पर जीवन संचालन की व्यवसायिक परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर की जो परंपरागत चीजें हैं उसे हम बड़ा व्यापारिक स्वरूप व मॉडल दे सकते हैं। यहां के तीखुर के आईसक्रीम का बड़ा बाजार हो सकता है। रामनाथ कश्यप ने कहा कि हम सभी को स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ना है ताकि दुनिया के लोग बस्तर आएं और बस्तर का नाम दुनिया में प्रतिष्ठित हो।

तकनीकी सत्र में प्रो. मधु विश्वनाथन कहा कि बिजनेस शुरू करने से पहले का, कैसन और काबर की जानकारी लेना जरूरी है। उन्होंने बताया कि बिजनेस शुरू करने के लिए उत्पादक, थोक विक्रेता, खुदरा बिक्रेता, ग्राहक, परिवहन, पूंजी रूप छह तत्वों की जानकारी की आवश्यकता होती है। प्रो मधु ने इन सारे तत्वों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए स्थानीय बिजनेस मॉडल की कमियों और मजबूती की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पैसे के अलावा अन्य तत्व भी व्यवसाय महत्वपूर्ण हैं।

आईआईटी भिलाई के मुख्य तकनीकी अधिकारी विष्णु वैभव द्विवेदी ने कहा कि बस्तर की स्वसहायता समूह की महिलाएं मेहनती एवं जुझारू हैं। यह प्रशिक्षण एक दीर्घकालिक निवेश है। इससे उन्हें बाजार को समझने की ताकत मिलेगी। विष्णु वैभव द्विवेदी ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से स्वरोजगार संबंधी छोटे-छोटे सपनों को साकार करने की आकांक्षी महिलाओं को ग्राहक की सोच, प्रोडक्ट की कीमत, मुनाफा, नुकसान समझने का मौका मिलेगा। वे अपने मेहनत का मूल्य पाने योग्य बन सकेंगी। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्वरोजगार के लिए सबकुछ है पर लोगों में बाजार की समझ और बाजार तक पहुंच कम है। यहां की महिलाएं भी सही जानकारी के साथ आप अपने प्रोडक्ट को ब्रांड बना सकती हैं।

स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत समन्वयक जगदीश पटेल ने कहा कि बस्तर के लिए उद्यमिता और स्वरोजगार जरूरी है। अपने उद्यमी कौशल से श्रेष्ठ उत्पाद बनाने सीख ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर के प्रोडक्ट की गुणबत्ता को बनाए रखने के साथ-साथ क्वांटिटी पर भी ध्यान देना जरूरी है।। आईआईएम अहमदाबाद के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अरूण श्रीकुमार ने कहा कि आप सभी नव उद्यमी बनकर ग्राहकों की समस्या का निदान कर सकते हैं। आप अपने स्थानीय बाजार के अवसर और मार्केटिंग को समझकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कस्टमर की मांग को पूरा कर सकते हैं।। इंडस्ट्री एक्सपर्ट डॉ. रवि सुंदराजन ने कहा कि आप सभी में बिजनेस के कई आइडिया हैं। आप जो स्वयं करेंगे वह बेहतर तरीका होगा। कार्यशाला के माध्यम से आप अपने बिजनेस के सोच को विस्तार दे सकते हैं।

कार्यशाला के दौरान सभी महिलाओं ने अपने अपने बिजनेस मॉडल बताए। कार्यक्रम के अंत में भानुप्रतापदेव पीजी कॉलेज,कांकेर के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में विभाग प्रचारक यज्ञ सिंह, आयोजन के संयोजक डॉ. तुलिका शर्मा सहित अन्य उपस्थित थे। संचालन डॉ रश्मि देवांगन ने किया व धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ राजेश लालवानी ने दिया।












